logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

हेडलाइन: उपकेंद्रों पर मनमानी, सबूतों पर खामोशी! सच उजागर करने वालों पर ही कार्रवाई—बिजली विभाग पर गंभीर आरोप

लखनऊ | विशेष रिपोर्ट

प्रदेश के बिजली उपकेंद्रों (Substations) से जुड़ा एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आ रहा है, जहां एक ओर उपभोक्ताओं के अधिकारों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर ठोस सबूत देने के बावजूद उच्च अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, कई जगहों पर JE (जूनियर इंजीनियर) और SDO (सब डिविजनल ऑफिसर) द्वारा विभागीय नियमों के विरुद्ध कार्य किए जा रहे हैं। उपकेंद्रों पर कनेक्शन, बिलिंग और बिजली सप्लाई से जुड़े फैसले बिना नियमों का पालन किए लिए जा रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कई उपभोक्ताओं और जागरूक नागरिकों ने इन अनियमितताओं के पुख्ता सबूत और साक्ष्य बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों को सौंपे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामलों में भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि जो लोग सच को सामने लाने की कोशिश करते हैं, उन्हें ही उल्टा झूठे मुकदमों में फंसाया जाता है, ताकि विभाग के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार को बेखौफ तरीके से जारी रखा जा सके और आम जनता का शोषण किया जा सके। यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।

यह घटनाक्रम संकेत देता है कि विभाग के अंदर कहीं न कहीं बड़े स्तर पर लापरवाही या संभावित मिलीभगत हो सकती है। जनहित के मुद्दों पर भी अगर प्रशासन चुप्पी साध ले, तो यह न केवल जनता के विश्वास को तोड़ता है बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

ऊर्जा मंत्री द्वारा हाल ही में उपकेंद्रों में चल रही अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन अनियमितताओं पर कब कार्रवाई होगी? क्या दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

Shivam dubey
Reporter
(Digital media)

56
1156 views

Comment