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कोयले से देश रोशन, लेकिन बड़कागांव-केरेडारी अंधेरे में: मूलभूत सुविधाओं से वंचित जनता में आक्रोश..

बड़कागांव/केरेडारी:- हजारीबाग जिले के बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कोयला खनन और दोहन के बावजूद स्थानीय जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। विडंबना यह है कि यहां की धरती से निकलने वाले कोयले से पूरे देश को बिजली मिल रही है, लेकिन इसी क्षेत्र के गांव आज भी विकास, सुविधा और अधिकार के मामले में अंधेरे में डूबे हुए हैं।

स्थानीय ग्रामीणों और रैयतों का कहना है कि वर्षों से क्षेत्र में लगातार कोयला खनन हो रहा है। भारी मशीनें दिन-रात धरती का सीना चीर रही हैं, ट्रकों और हाईवा वाहनों से सड़कों पर कोयले की ढुलाई हो रही है, लेकिन इसके बदले यहां की जनता को न तो बेहतर सड़क मिली, न शुद्ध पेयजल, न स्वास्थ्य सुविधा, न गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और न ही प्रदूषण से राहत।

ग्रामीणों का आरोप है कि खनन और कोयला ढुलाई से क्षेत्र में धूल, धुआं और शोर का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। खेत-खलिहान प्रभावित हो रहे हैं, जनजीवन अस्त-व्यस्त है और बच्चों, बुजुर्गों तथा महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। इसके बावजूद जब स्थानीय लोग प्रदूषण, मुआवजा, विस्थापन और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर आवाज उठाते हैं, तो उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है।

लोगों का आरोप है कि अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन करने वाले ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि विरोध की आवाज को कमजोर किया जा सके। इससे क्षेत्र में भय और असंतोष का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर सिर्फ संसाधनों का दोहन हो रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों को उनका हक नहीं मिल रहा।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस क्षेत्र की खदानें देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रही हैं, उसी क्षेत्र के गांवों में आज भी बिजली, सड़क, पानी, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव क्यों है? ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जनता की पीड़ा दिखाई नहीं देती। क्षेत्रीय समस्याओं को नजरअंदाज कर सिर्फ कागजों पर विकास दिखाया जा रहा है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल मूलभूत सुविधाएं बहाल की जाएं, प्रदूषण नियंत्रण के ठोस उपाय किए जाएं, रैयतों को न्यायसंगत मुआवजा और रोजगार दिया जाए तथा आंदोलनकारियों पर दर्ज झूठे मुकदमों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें वापस लिया जाए।

ग्रामीणों का कहना है:-
"हमारी धरती का कोयला पूरे देश को रोशन कर रहा है, लेकिन हमारे गांव आज भी अंधेरे, धूल और उपेक्षा में जी रहे हैं।

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