कर्पूरी ठाकुर की राजनीति पर सभी दलों की नजर
पटना से बड़ी खबर — बिहार की राजनीति में एक बार फिर जननायक कर्पूरी ठाकुर का नाम सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।
आगामी बिहार चुनाव को देखते हुए लगभग हर बड़ी पार्टी कर्पूरी ठाकुर की विरासत को अपना बताने में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार तक, सभी नेता उनके सामाजिक न्याय, पिछड़ों के हक और आरक्षण मॉडल को याद कर रहे हैं। 
कर्पूरी ठाकुर वही नेता थे जिन्होंने बिहार में 1978 में 26% आरक्षण मॉडल लागू किया था, जिसमें OBC, MBC, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अलग-अलग हिस्सेदारी दी गई थी। यही मॉडल आज भी बिहार की राजनीति की सबसे मजबूत नींव माना जाता है। 
हाल ही में उनके गांव कर्पूरी ग्राम, समस्तीपुर में राजनीतिक हलचल तेज हुई, जहां सभी दल उनके नाम पर पिछड़ा और अति पिछड़ा वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। चुनावी माहौल में उनका नाम फिर से बिहार की सियासत का केंद्र बन चुका है। 
सवाल यही है — क्या नेता सच में जननायक के सिद्धांतों पर चल रहे हैं, या सिर्फ उनके नाम पर वोट मांग रहे हैं?