आज श्रील प्रभुपाद जी के प्रिय पार्षद त्रिदण्डिस्वामी श्री श्रीमद् भक्ति विचार यायावर गोस्वामी महाराज जी की आविर्भाव तिथि पर विशेष
आज श्रील प्रभुपाद जी के प्रिय पार्षद त्रिदण्डिस्वामी श्री श्रीमद् भक्ति विचार यायावर गोस्वामी महाराज जी की आविर्भाव तिथि है।
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*तुम सबको भगवान के ऊपर विश्वास नही हैं?*
एक समय श्रील महाराज एक माह के लिए प्रचार के लिए गए। इधर मठ में कार्तिक व्रत करने के लिए भक्तों के लिए प्रसाद की कैसे व्यवस्था होगी, यह सोचकर मठवासी चिन्तित हो गए। तब यह सुनकर श्रील महाराज जी ने कहा-
क्या तुम सबको भगवान के ऊपर विश्वास नहीं है? जिन्होंने अपने मुख से कहा है- 'योगक्षेमम् वहाम्यहम्', यह कभी झूठा नहीं होगा। उन्होंने कहा–"आप सब मिलकर नाट्य मन्दिर में जाकर उच्च स्वर से हरिनाम करते रहो, उसके बाद क्या होगा में देखूंगा। भगवान के ऊपर विश्वास रखो।"
श्रील महाराज के वचन सुनकर सभी कीर्तन करने लगे।
कुछ समय बाद बाहर से एक व्यक्ति महाराज जी के पास आया और कहा कि गांव के एक धनाढ्य व्यक्ति ने खबर भेजी है कि एक माह व्रत पालन के लिए जो खर्च होगा, वह सेवा मैं करूँगा। उन्होंने सारा आटा, चावल, घी, दाल, मसाला इत्यादि सब भेज दिया।
तब महाराज जी ने सबको बुलाकर कहा,
"देखो, भगवान कैसे रक्षा करते हैं।"
जिन व्यक्ति ने यह सेवा की थी, वे प्रतिदिन कार्तिक मास में महाराज जी के मुख से हरिकथा श्रवण करते व अन्त में उन्होंने अपनी पत्नी समेत श्रील महाराज जी से हरिनाम व दीक्षा ग्रहण की।