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उत्तराखंड के प्रतिष्ठित हॉस्पिटल्स में वालंटियर के माद्यम से मरीज़ो को ABHA कार्ड बन रहा है

देश में डिजिटल हेल्थ सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने ABHA (Ayushman Bharat Health Account) कार्ड की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य हर नागरिक का एक यूनिक हेल्थ आईडी बनाना है, जिससे उनके मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित और आसानी से एक्सेस किया जा सके।

सरकार की ओर से फिलहाल ABHA कार्ड बनवाना अनिवार्य नहीं किया गया है। यह पूरी तरह स्वैच्छिक है यानी नागरिक अपनी इच्छा से इसे बनवा सकते हैं। हालांकि, सरकार लगातार लोगों को इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है ताकि स्वास्थ्य सेवाएं ज्यादा तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बन सकें।



डॉक्टर और अस्पताल जरूरत पड़ने पर मरीज़ की अनुमति से रिकॉर्ड देख सकते हैं| इलाज के दौरान बार-बार कागजी रिपोर्ट ले जाने की जरूरत कम होती है, आप देश के अलग-अलग अस्पतालों में आसानी से इलाज करवा सकते हैं |



सरकार ने ABHA कार्ड को लेकर कुछ अहम गाइडलाइन्स जारी की हैं:

१) स्वैच्छिक भागीदारी – किसी भी नागरिक पर ABHA कार्ड बनवाने का दबाव नहीं डाला जाएगा।



२) डेटा की गोपनीयता – मरीज का स्वास्थ्य डेटा पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा और बिना अनुमति के साझा नहीं किया जाएगा।



नागरिक अपने मोबाइल या ऑनलाइन पोर्टल या ABHA APP के जरिए अपने हेल्थ रिकॉर्ड को कभी भी देख सकते हैं।



आधार या मोबाइल से लिंकिंग – ABHA कार्ड बनवाने के लिए आधार या मोबाइल नंबर का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह भी पूरी तरह विकल्प के तौर पर है।



ABHA कार्ड अभी अनिवार्य नहीं है, लेकिन डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड रखने के लिए यह एक उपयोगी और सुरक्षित विकल्प है। सरकार का जोर इसे अपनाने पर है, न कि इसे बाध्यकारी बनाने पर। उत्तराखंड के प्रतिष्ठित हॉस्पिटल्स में वालंटियर के माद्यम से मरीज़ो को ABHA कार्ड बनाने में सहायता की जा रही है| जॉली ग्रांट हॉस्पिटल देहरादून में इसकी कवायत देखने को मिली|

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