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जमशेदपुर में पुलिस जवान के साथ मारपीट का आरोप, बेटी की शादी के लिए छुट्टी न मिलने से आक्रोश

जमशेदपुर से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक पुलिस जवान ने अपने ही विभाग के भीतर मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। यह घटना न सिर्फ पुलिस महकमे की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की कमी को भी उजागर करती है।

क्या है पूरा मामला?

गोलमुरी पुलिस लाइन में तैनात जिला पुलिस बल के जवान कमलेश कुमार शर्मा के अनुसार, उनकी बेटी की शादी मई महीने में तय है, जिसमें 7 मई को तिलक समारोह होना है। इस महत्वपूर्ण पारिवारिक अवसर के लिए उन्होंने पहले ही छुट्टी का आवेदन दे रखा था।

लेकिन जब काफी समय तक छुट्टी मंजूर नहीं हुई, तो वे इसकी जानकारी लेने के लिए मेजर कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों—दिलीप, जयपाल और अन्य—ने उनके साथ न सिर्फ दुर्व्यवहार किया, बल्कि मारपीट भी की।

“बेटी की शादी में भी छुट्टी नहीं?”

पीड़ित जवान का कहना है कि वे साल 2015 से लगातार जमशेदपुर में सेवा दे रहे हैं और लंबे समय से उन्हें एक बार भी छुट्टी नहीं मिली है। इससे पहले वे लातेहार जिले में पदस्थापित थे।

कमलेश शर्मा का दर्द साफ झलकता है—

“अगर बेटी की शादी जैसे जरूरी मौके पर भी छुट्टी नहीं मिलेगी, तो हम अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारियां कैसे निभाएंगे?”

मानसिक रूप से टूटे जवान

इस घटना के बाद जवान खुद को अपमानित और मानसिक रूप से टूट चुका बता रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से परिवार से दूर रहने के बावजूद उन्होंने पूरी निष्ठा से ड्यूटी निभाई, लेकिन बदले में उन्हें प्रताड़ना मिली।

विभाग पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या पुलिसकर्मियों को बुनियादी मानवीय अधिकार भी नहीं मिलते?

क्या छुट्टी मांगना अपराध बन गया है?

और सबसे अहम—क्या विभाग के भीतर अनुशासन बनाए रखने के नाम पर इस तरह की हिंसा जायज है?

जांच की मांग

मामले के सामने आने के बाद अब निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ अनुशासनहीनता, बल्कि मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी मामला बन सकता है।

निष्कर्ष
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जो जवान दिन-रात आम जनता की सुरक्षा में लगे रहते हैं, क्या उनकी अपनी समस्याओं और भावनाओं की कोई कीमत नहीं है? प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और न्यायपूर्ण कार्रवाई करनी चाहिए।

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