logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

ECHS Scheme अच्छी है मगर सुधार करें। अस्पतालों और ECHS के गैप को साकार करें ।।

होशियारपुर: 26 अप्रैल,2026 (बूटा ठाकुर गढ़शंकर)
भारत सरकार की तरफ से साबका सैनिकों के लिए चलाई गई ECHS Scheme बहुत ही बेहतर है पर इसमें कुछ एक खामियां भी हैं जिनसे सैनिकों को दो चार होना पड़ता है।
खासकर लॉन्ग टर्म की क्रोनिक बीमारियों के सुविधाजनक इलाज के लिए।
मसलन गंभीर बीमारियों के चलते जब कोई पेशेंट रैफरल लेकर किसी अस्पताल जाता है तो अस्पताल वाले इलाज तो करते हैं बल्कि क्रिटिकल ऑपरेशन भी हो जाते हैं पर कुछ परेशानियां भी सामने आती हैं:
1. पेशेंट का अस्पताल की तरफ़ से जो भी इन्वेस्टिगेशन टेस्ट किए जाते हैं उसकी रिपोर्ट्स नहीं दी जाती जबकि पेशेंट का हक है कि इलाज या ऑपरेशन से पहले किसी और डाक्टर से ओपिनियन ले सके। क्योंकि आज के दौर में इलाज को बिजनेस के तौर पर देखा जाता है। एक्सपेरिमेंट और पैसे को तवज्जों दी जाती है, मामूली उपचार को क्रिटिकल बना दिया जाता है। ऐसे में पेशेंट के साथ खिलवाड़ और सरकार के खजाने को चूना लगाने के मौके भी बन जाते हैं।
2. ऑपरेशन या इनडोर ट्रीटमेंट के चलते जब पेशेंट को हफ्ता दस दिन बाद डिस्चार्ज किया जाता है तो सिर्फ़ हफ्ता दस दिन की दवाई ही दी जाती है और दुबारा ओपीडी के लिए बुलाया जाता है तो दवाई प्रेस्क्राइब तो की जाती है पर उसे ECHS पर छोड़ दिया जाता है। अब ECHS में प्रेस्क्राइब की हुई दवाई proper नहीं मिल पाती यदि मिलती भी है तो लगभग सभी साल्ट अलग अलग होते हैं जिसे खाने में पेशेंट सहजता महसूस नहीं करता। अतः लोकल परचेजिंग उपलब्धता में भी 2 से 3 दिन लग जाते हैं।
जिससे पेशेंट की एंजायटी और परेशानी बढ़ जाती है।
3. ECHS में मिलने वाली वाली दवाइयां में साल्ट अलग अलग तो होते ही हैं पर उसमें कई बार tab mg की भी समस्या आती है। जैसे मानो कोई बीपी की tab 75 mg लेता है तो उसे उपलब्ध 25mg मिलती है जो एक समय में तीन tab लेनी होगी+ दूसरी दवाइयां अलग से। इतनी सारी दवाइयां देखकर पेशेंट का तिलमिलाना तो जायज़ ही है।
4. किसी को हियरिंग ऐड मशीन या कोई अन्य मेडिकल उपकरण चाहिए तो दो दो साल की वेटिंग से गुजरना पड़ता है।
सरकार के लिए यह समस्याएं छोटी हो सकती हैं पर पेशेंट के लिए बहुत ही कष्टदायक हैं।
इसके सुधार में सरकार को पहल करनी चाहिए।
गंभीर पेशेंट का इलाज़ करने के बाद कम से कम तीन महीने तक अस्पताल से ही सारी दवाइयां मिलनी चाहिए ताकि यकीनन उसकी रिकवरी जल्दी से जल्दी हो सके।
बाकी उपरोक्त कुछ समस्याएं ECHS लेवल की हैं जिन्हें तुरंत सुधारा जा सकता है। आशा है सरकार इस पर तुरंत संज्ञान लेगी।

154
11634 views

Comment