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*नागौर में फर्जी रजिस्ट्री का बड़ा खेल, मृतका के 4 साल बाद 'जिंदा' होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल?* *परिवार के संघर्ष और जिला कलेक्टर

*नागौर में फर्जी रजिस्ट्री का बड़ा खेल, मृतका के 4 साल बाद 'जिंदा' होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल?*
*परिवार के संघर्ष और जिला कलेक्टर के हस्तक्षेप के 25 दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर*
नागौर। राजस्थान के नागौर जिले में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने उप-पंजीयन कार्यालय की कार्यप्रणाली और सरकारी दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह मामला एक ऐसी महिला की जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ा है, जिनका निधन चार साल पहले ही हो चुका था, लेकिन भू-माफियाओं ने उन्हें 'जिंदा' दिखाकर बेशकीमती प्लॉटों का सौदा कर दिया। नागौर के गुड़ला क्षेत्र में स्थित खसरा संख्या 129 की देव नगर में प्लॉट को लेकर यह पूरा फर्जीवाड़ा रचा गया। ये प्लॉट कौशल्या देवी के नाम पर दर्ज थे, जिनका 14 मई 2021 को कोरोना काल के दौरान निधन हो गया था। हैरानी की बात यह है कि कौशल्या देवी के निधन के लगभग 4 साल बाद, 1 अप्रैल 2026 को उप-पंजीयन कार्यालय में उनके नाम से इन प्लॉटों की रजिस्ट्री अन्य किसी व्यक्ति के नाम कर दी गई। इस प्रक्रिया में एक अन्य महिला को कौशल्या देवी बनाकर पेश किया गया और फर्जी आधार कार्ड व हस्ताक्षरों का सहारा लिया गया।
परिजनों द्वारा की गई निजी जांच में सामने आया कि रजिस्ट्री से ठीक दो दिन पहले, 30 मार्च 2026 को अशफाक नाम के व्यक्ति ने उप-पंजीयन कार्यालय से कौशल्या देवी के मूल दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां निकलवाई थीं। इसके बाद सुनियोजित तरीके से एक डमी महिला को खड़ा कर रजिस्ट्री को अंजाम दिया गया।
*परिजनों का संघर्ष और जिला कलेक्टर के हस्तक्षेप के कारण दर्ज हुई एफआईआर*
मामले का खुलासा होने के बाद कौशल्या देवी के भतीजे इंद्रचंद अग्रवाल और भाई हरनारायण अग्रवाल ने उप-पंजीयन कार्यालय में मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ शिकायत दर्ज कराई। परिजनों का पहला आरोप है कि रजिस्ट्रार ऑफिस के कर्मचारियों ने बिना गहन जांच-पड़ताल के अन्य महिला की उपस्थिति में गलत पहचान को स्वीकार कर लिया, दुसरा आरोप यह है कि उप-पंजीयन अधिकारियों को मामले की जानकारी मिलने के बाद भी पीड़ितों को रजिस्ट्री की नकल उपलब्ध नहीं कराई और न ही दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की। तीसरा आरोप नियमानुसार विभाग को धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवानी थी, लेकिन जिला कलेक्टर की कड़ी फटकार और स्पष्ट आदेश के दूसरे दिन विभाग द्वारा मुकदमा दर्ज करवाया गया है।
वर्तमान स्थिति
नागौर जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए फटकार लगाई है और आदेश जारी किए हैं उप पंजीयन विभाग अधिकारियों ने कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद कछपछाहट से 25 दिन बाद आरोपियों पर मुकदमा दर्ज करवाया, यह सब बातें रजिस्ट्रार ऑफिस के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को गहरे संदेह के घेरे में लाती है। पीड़ित परिवार आज तक न्याय के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहा है।"यह मामला न केवल एक जमीन की धोखाधड़ी है, बल्कि सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर भी हमला है। अगर मृत व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री हो सकती है, तो आम आदमी की संपत्ति कितनी सुरक्षित है, यह एक बड़ा सवाल है।" — परिजनों का वक्तव्ययह प्रकरण स्पष्ट करता है कि नागौर में भू-माफियाओं का जाल कितना गहरा है और उन्हें सरकारी मशीनरी के भीतर से भी मौन समर्थन मिल रहा है। मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों की गिरफ्तारी ही इस व्यवस्था में जनता का विश्वास बहाल कर सकती है।

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