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सरहदों के पार 'सुशासन बाबू' का जलवा

साल 2012 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अनोखा अध्याय लिख रही थी, जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ 8 दिनों की सरकारी यात्रा पर पाकिस्तान की सरजमीं पर उतरे थे। इस दौरे का सबसे चर्चित और हैरान कर देने वाला दृश्य तब सामने आया जब सिंध और पंजाब प्रांत के दूर-दराज के गांवों की दीवारों पर उर्दू में लिखे नारे दिखाई दिए, जिन पर एक तरफ लिखा था—'पाकिस्तान का होने वाला प्रधानमंत्री इमरान खान जिंदाबाद' और दूसरी तरफ 'हिंदुस्तान का होने वाला प्रधानमंत्री नीतीश कुमार जिंदाबाद'।

यह कोई मामूली नारेबाजी नहीं थी, बल्कि तत्कालीन पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान की उस गहरी रुचि का नतीजा थी, जो उन्होंने नीतीश कुमार के 'बिहार विकास मॉडल' में दिखाई थी। इमरान खान ने नीतीश कुमार की 'गुड गवर्नेंस' को पाकिस्तान के लिए एक आदर्श मंत्र माना था और खुद स्वीकार किया था कि वे बिहार में हुए बदलावों से अपनी पार्टी के लिए सबक ले रहे हैं।

आज भी यह घटनाक्रम इस बात का गवाह है कि कैसे सुशासन की गूंज सरहदों की बंदिशों को तोड़कर पड़ोसी मुल्क की दीवारों तक जा पहुंची थी।


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