श्रीचैतन्य गौड़ीय चंडीगढ़ में इस्कॉन के स्वामी रुक्मणी कृष्ण महाराज जी का भव्य स्वागत
दिनांक 6 मई 2026 की संध्या को, इस्कॉन उत्तर भारत के क्षेत्रीय सचिव पूज्यपाद श्रील रुक्मिणी कृष्ण गोस्वामी महाराज के संन्यास ग्रहण करने के उपरांत चंडीगढ़ मठ में उनके प्रथम आगमन पर भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया गया।
महाराज जी के साथ इस्कॉन चंडीगढ़ के सह-प्रेसिडेंट श्रीपाद अक्रूर नंदन प्रभु, इस्कॉन पंजाबी बाग, दिल्ली के पूर्व टेंपल कमांडर श्रीपाद सर्वज्ञ दामोदर प्रभु तथा इस्कॉन चंडीगढ़ के 11 ब्रह्मचारी और कुछ गृहस्थ भक्त भी पधारे।
चंडीगढ़ मठ के मठ-रक्षक श्रीभक्ति विकास वामन महाराज एवं दिल्ली मठ के मठ-रक्षक श्रीभक्ति विवेक नरसिंह महाराज के सान्निध्य में 250 से अधिक भक्तों द्वारा ठाकुर जी की प्रसादी माला, चंदन अर्पित कर एवं पुष्पवर्षा करते हुए महाराज जी का भव्य स्वागत किया गया।
अपने प्रवचन में महाराज जी ने कहा कि प्रारम्भ से ही इस्कॉन और श्रीचैतन्य गौड़ीय मठ के बीच अत्यंत मधुर संबंध रहे हैं। स्वामी प्रभुपाद जी ने अपने प्रिय शिष्य श्रील जय पताका स्वामी महाराज को स्वामी ए. सी. भक्ति वेदांत चैरिटेबल ट्रस्ट' की सेवा सौंपी थी, जिससे सभी वैष्णव एकजुट होकर रह सकें। साथ ही पूज्यपाद विष्णु महाराज जी को भी इस ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था।
सभा में श्रीरुक्मणी कृष्ण महाराज जी ने कहा, मैं मानता हूँ कि जितना हम मिलकर रहेंगे, उतनी ही हमारी शक्ति बढ़ेगी। देखने में भले ही दो अलग संस्थाएँ प्रतीत हों, किन्तु हमारा उद्देश्य एक ही हैइसे ही विविधता में एकता कहा जाता है। आज यहाँ आकर मुझे अनुभव हुआ कि मेरा बहुत बड़ा परिवार है।
श्री रुक्मणी कृष्ण महाराज जी ने यह भी कहा -- विशेष रूप से यह कार्यक्रम मठ के वर्तमान आचार्य श्रीमद् भक्ति विचार विष्णु महाराज की प्रेरणा से आयोजित हुआ। वे समय-समय पर इस्कॉन के कार्यक्रमों में भी सम्मिलित होते रहते हैं तथा कई बार अपनी इच्छा से इस्कॉन की सेवा हेतु उदारतापूर्वक सहयोग भी प्रदान करते हैं। इससे उनके विशाल हृदय का परिचय मिलता है।
कार्यक्रम के अंत में पूज्यपाद भक्ति विकास वामन महाराज जी द्वारा मठ की ओर से महाराज जी एवं उनके साथ पधारे सभी ब्रह्मचारियों को प्रणामी, ग्रंथ एवं प्रसाद भेंट कर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात सभी भक्तों के लिए प्रसाद की भी व्यवस्था की गई थी ।