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बिहार सरकार के 6 महीने: वादों और ज़मीनी हकीकत पर सवाल जन सुराज पार्टी

बिहार सरकार के छह महीने पूरे होने के अवसर परजन सुराज पार्टी राज्यभर में विरोध प्रदर्शन एवं प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया। पार्टी का कहना है कि सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, उद्योग और प्रशासनिक सुधार को लेकर किए गए कई दावों पर अपेक्षित गति से काम नहीं दिख रहा है, जिससे आम जनता में निराशा का माहौल बन रहा है।
जन सुराज नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव और गठन के समय जो बड़े वादे किए थे, उन पर स्पष्ट प्रगति रिपोर्ट जनता के सामने नहीं रखी गई। पार्टी का दावा है कि रोजगार के अवसरों की कमी के कारण मजदूरों का 75,%पलायन जारी है, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रों का दूसरे राज्यों की ओर रुख 80%बना हुआ है तथा किसान आज भी लागत, बाजार और सहायता से जुड़ी चुनौतियों से85% जूझ रहे हैं।
पार्टी ने सरकार से मांग की कि वह छह महीने का श्वेत पत्र (White Paper) जारी करे और निम्न विषयों पर तथ्यात्मक रिपोर्ट सार्वजनिक करे—
रोजगार सृजन और नए अवसरों का वास्तविक आंकड़ा
मजदूर पलायन और उसके समाधान की नीति
छात्रों के राज्य से बाहर जाने के आंकड़े एवं शिक्षा सुधार
किसानों की आय, फसल सहायता और कृषि योजनाओं की स्थिति
स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और अस्पतालों की स्थिति
योजनाओं की प्रगति, बजट खर्च और पारदर्शिता रिपोर्ट
जन सुराज ने यह भी कहा कि जनता मंत्री परिषद और सरकार के कामकाज का मूल्यांकन परिणामों के आधार पर करेगी, न कि केवल घोषणाओं के आधार पर। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं में स्पष्टता और जवाबदेही की कमी दिखाई दे रही है।
20 मई 2026 को राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और विरोध कार्यक्रमों के माध्यम से जन सुराज ने यह संदेश देने की बात कही कि वह जनता से जुड़े मुद्दों— शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसान और युवाओं— पर निरंतर आवाज उठाता रहेगा।
“जनता ने उम्मीद दी थी, अब सरकार जवाब दे — काम का हिसाब और वादों का जवाब।”

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