logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

कम वजन और प्री-मैच्योर तीन नवजातों को मिला नया जीवन, करीब दो माह के इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटेंगे जुड़वां नवजात



जिला अस्पताल के एसएनसीयू में मिली जिंदगी की नई उम्मीद

कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने भी एसएनसीयू पहुंचकर बच्चों का स्वास्थ्य जाना, चिकित्सीय टीम के प्रयासों की सराहना की

जब चिचोली निवासी मनीषा और दिलीप काकोडिया के जुड़वां बच्चों का जन्म समय से पहले हुआ, तो परिवार की खुशियों के साथ चिंता भी बढ़ गई। 30 सप्ताह में जन्मे दोनों नवजात बेहद कमजोर थे। एक बच्चे का वजन केवल 1.240 किलो और दूसरी बच्ची का वजन महज 800 ग्राम था। सांस लेने में तकलीफ और बेहद कम वजन के कारण दोनों बच्चों की हालत नाजुक बनी हुई थी।

परिजनों ने तत्काल दोनों बच्चों को जिला अस्पताल बैतूल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने लगातार निगरानी में उपचार शुरू किया। बच्चों को सीपैप (CPAP) और ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए सर्फेक्टेंट थेरेपी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन जैसी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए बच्चों को आवश्यक एंटीबायोटिक भी दिए गए। शुरुआती दिनों में बच्चों को नली के माध्यम से दूध दिया गया, बाद में उनकी स्थिति में सुधार होने पर कटोरी-चम्मच से फीडिंग शुरू की गई। साथ ही कंगारू मदर केयर पद्धति से बच्चों की देखभाल की गई, जिससे उनके वजन और स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ। लगभग दो महीने तक चले इलाज, देखभाल और सतत मॉनिटरिंग के बाद दोनों बच्चों की हालत में सुधार आने लगा। डिस्चार्ज के समय बालक का वजन बढ़कर 1.720 किलो और बच्ची का वजन 1.300 किलो हो चुका था।

ऐसी ही एक और उम्मीद की कहानी प्रभात पट्टन क्षेत्र के सवांगी गांव से सामने आई। यहां निवासी अनिल धुर्वे और मीनाक्षी धुर्वे की नवजात बच्ची का जन्म भी समय से पहले हुआ था। जन्म के समय उसका वजन महज 1.050 किलो था। बच्ची को सांस लेने में परेशानी होने लगी, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल बैतूल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में बच्ची को लगातार सीपैप और ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। संक्रमण से बचाव के लिए दवाइयां दी गईं तथा विशेष पोषण और देखभाल सुनिश्चित की गई। करीब 39 दिनों तक चले उपचार के बाद बच्ची स्वस्थ होकर घर लौटी। डिस्चार्ज के समय उसका वजन बढ़कर 1.320 किलो हो गया था।

इन नवजातों के सफल उपचार में एसएनसीयू प्रभारी डॉ. आशीष सिंह ठाकुर और उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉ. ठाकुर बताते हैं कि समय पूर्व जन्मे और कम वजन वाले बच्चों के लिए शुरुआती दिन बेहद चुनौतीपूर्ण होते हैं, लेकिन सही समय पर इलाज, संक्रमण से बचाव और निरंतर देखभाल से उन्हें स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है।

विशेष बात यह रही कि इन सभी बच्चों का उपचार जिला अस्पताल में पूरी तरह निशुल्क किया गया। चिकित्सकों के अनुसार यदि यही उपचार किसी निजी अस्पताल में कराया जाता, तो बच्चों के माता-पिता पर लगभग 4 से 5 लाख रुपए तक का आर्थिक भार आ सकता था। जिला अस्पताल में आधुनिक मशीनों, विशेषज्ञ उपचार और निरंतर निगरानी की सभी सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई गईं, जिससे जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिली।

कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने भी जिला अस्पताल पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने एसएनसीयू यूनिट की व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाएं और संवेदनशील चिकित्सा सेवाएं जरूरतमंद परिवारों के लिए भरोसे का आधार बनी हैं।

➡️ बच्चों के माता-पिता ने किया आभार व्यक्त

जुड़वां बच्चों की माता श्रीमती मनीषा काकोडिया और पिता श्री दिलीप काकोडिया ने बताया कि जन्म के समय उनके दोनों बच्चों का वजन बहुत कम था, जिससे पूरा परिवार चिंतित था। बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल बैतूल लाया गया, जहां एसएनसीयू में भर्ती कर उनका इलाज शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों और स्टाफ की लगातार देखभाल एवं मेहनत से बच्चों के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार आया और अब उन्हें डिस्चार्ज किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि “आज हमारे बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं, इससे हमारी चिंता काफी कम हुई है। अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने पूरी मेहनत और संवेदनशीलता के साथ बच्चों की देखभाल की। इलाज के दौरान हमें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई और न ही कोई खर्च करना पड़ा। हम पूरी स्वास्थ्य टीम के हमेशा आभारी रहेंगे।”

इसी प्रकार प्रभात पट्टन निवासी श्री अनिल धुर्वे और श्रीमती मीनाक्षी धुर्वे ने भी अपनी बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार होने पर जिला अस्पताल की एसएनसीयू टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समय पर मिले उपचार और डॉक्टरों की सतत निगरानी से उनकी बच्ची अब स्वस्थ है और परिवार को नई उम्मीद मिली है।

16
815 views

Comment