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पीएफ, ग्रेच्युटी और वेतन भुगतान को लेकर श्रमिकों की लड़ाई तेज

पीएम पोर्टल पर दर्ज शिकायत बंद होने के बाद एडवोकेट उपेंद्र सिंह ने दायर की अपील, कहा – “बिना समाधान शिकायत भेजना कर्मचारियों के साथ अन्याय”

उधम सिंह नगर स्थित Flexituff Ventures International Limited के श्रमिकों का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। श्रमिकों के वेतन, पीएफ, ग्रेच्युटी और अवैध ले-ऑफ को लेकर लगातार उठ रही आवाज अब प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है। प्रदेश महामंत्री विश्व हिंदू रक्षा संगठन एवं अधिवक्ता उपेंद्र सिंह के प्रयासों से कर्मचारियों की शिकायतें लगातार विभिन्न सरकारी पोर्टलों पर दर्ज कराई जा रही हैं, लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि अभी तक किसी भी पीड़ित श्रमिक को वास्तविक राहत नहीं मिल सकी है।

हाल ही में सामने आए दस्तावेज के अनुसार, शिकायत संख्या PMOPG/E/2026/0069972 प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई थी, जिसमें कर्मचारी हिमांशु कुमार की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए। शिकायत में कहा गया कि कंपनी द्वारा कई कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं किया गया, वेतन भुगतान रोका गया तथा ग्रेच्युटी का भुगतान भी लंबित है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि सितंबर 2025 से कंपनी द्वारा कथित रूप से अवैध ले-ऑफ लागू किया गया, जिसके कारण हजारों श्रमिक और उनके परिवार आर्थिक संकट में फंस गए।

शिकायत में यह भी कहा गया कि करीब 2000 कर्मचारी पिछले कई महीनों से बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। कई परिवार किराया, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक खर्च तक पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन और संबंधित विभागों के बीच फाइलें घूमती रहीं लेकिन जमीनी स्तर पर समाधान नहीं हुआ।

दस्तावेज के अनुसार, शिकायत को EPFO से संबंधित मामला बताते हुए अन्य विभाग को ट्रांसफर कर दिया गया और बाद में केस को “Closed” दिखा दिया गया। हालांकि शिकायतकर्ता ने पोर्टल पर साफ तौर पर लिखा कि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है और मामला बिना कार्रवाई दूसरे विभाग को भेज दिया गया। इसके बाद अधिवक्ता उपेंद्र सिंह द्वारा इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई है।

अपील में मांग की गई है कि:

कर्मचारियों का बकाया वेतन तुरंत दिलाया जाए।

कई वर्षों से लंबित पीएफ जमा कराया जाए।

ग्रेच्युटी और अन्य श्रमिक लाभों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

अवैध ले-ऑफ की जांच कर कंपनी पर श्रम कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए।

प्रभावित श्रमिक परिवारों को राहत और सहायता प्रदान की जाए।


एडवोकेट उपेंद्र सिंह ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो श्रमिकों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रमिक महीनों से सरकारी दफ्तरों और पोर्टलों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी अधिकारी ने ठोस समाधान नहीं दिया।

श्रमिकों का कहना है कि वे न्याय की उम्मीद में लगातार संघर्ष कर रहे हैं और अब उनकी निगाहें केंद्र एवं उत्तराखंड सरकार की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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