देवरी जनपद की ग्राम पंचायत कुसमी में सरपंच-सचिव की कथित लूट: फर्जी बिलों और महंगे ठेकों से लाखों की बर्बादी।
देवरी जनपद की ग्राम पंचायत कुसमी में सरपंच-सचिव की कथित लूट: फर्जी बिलों और महंगे ठेकों से लाखों की बर्बादी।
देवरी (सागर), 21 मई 2026 — मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुसमी में सरपंच और सचिव द्वारा कथित भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी पोर्टल atdarpan.gov.in पर उपलब्ध दस्तावेजों और टैक्स इनवॉइस के अनुसार, एक ही प्रकार के कार्यों के लिए बार-बार भारी-भरकम रकमें स्वीकृत की गई हैं। कचरा परिवहन, सफाई, नलजल योजना, मड़ई महोत्सव और निर्माण सामग्री जैसे कार्यों में कुल मिलाकर लाखों रुपये के घपले का आरोप लग रहा है।
फर्जी और अतिरंजित बिलों का खेल
पंचायत पोर्टल पर उपलब्ध विवरणों के अनुसार:
मड़ई महोत्सव के नाम पर 15,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक की राशि अलग-अलग एंट्री में दिखाई गई है।
कचरा सफाई एवं परिवहन के लिए एक ही काम के नाम पर 15,000, 36,000, 43,000 और 48,000 रुपये जैसे अलग-अलग बिल पास किए गए।
मुर्रम गिट्टी परिवहन के नाम पर 43,000 रुपये।
नलजल योजना से संबंधित 36,000 रुपये।
एक टैक्स इनवॉइस में 48,000 रुपये की राशि मात्र 48 बोरी (या 48 यूनिट) सामग्री के लिए दिखाई गई है, जिसकी दर 1,000 रुपये प्रति यूनिट से भी अधिक है।
स्थानीय ठेकेदार श्री गणेश कंस्ट्रक्शन, महेश स्टेट्स आदि के बिलों में हैंडराइटिंग और एंट्री में स्पष्ट असंगतियां दिख रही हैं। एक बिल पर 330 बोरी का उल्लेख है, जबकि दूसरी जगह मात्र 48 यूनिट पर 48,000 रुपये। ग्राम पंचायत कुसमी के सरपंच और सचिव पर आरोप है कि उन्होंने इन कार्यों को वास्तव में कराए बिना या बहुत कम खर्च करके शेष राशि हड़प ली।
सरकारी पोर्टल पर खुलेआम घोटाला
atdarpan.gov.in पोर्टल पर “विवरणों की सूची” में दर्ज सभी एंट्रीज 1.00 मात्रा दिखा रही हैं, जबकि दरें आकाश छू रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर इतनी बड़ी रकम एक साथ और बार-बार एक ही मद में खर्च करना संदिग्ध है।
ईपीआईओ संख्या 3839898 के तहत दर्ज कई भुगतान पहले ही हो चुके हैं।
पोर्टल पर India.gov.in, Incredible India, MyVisit, eGazette और NIC के लोगो के साथ ये एंट्रीज सरकारी वैधता का जामा पहनकर पेश की जा रही हैं, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में न तो कोई बड़ी सफाई हुई, न कोई नलजल योजना का काम दिखाई दिया और न ही मड़ई महोत्सव में इतना खर्च हुआ।
ग्रामीणों की नाराजगी
कुसमी गांव के रहवासी बताते हैं, “सचिव साहब और सरपंच जी हर महीने नया-नया बिल बना लेते हैं। कचरा तो वही पड़ा रहता है, लेकिन बिल पास हो जाते हैं।” स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और पंचायत अधिकारी मिलीभगत से काम करते हैं। ज्यादातर बिल हैंडराइटन हैं और इनमें GST नंबर, वाहन नंबर और पूरा पता भी संदिग्ध है।
एक टैक्स इनवॉइस पर GSTIN-23JRTPD9544K1Z1 दर्ज है, जिसकी जांच की मांग ग्रामीण कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार की परंपरा या सिस्टमिक गड़बड़ी?
मध्य प्रदेश के पंचायती राज विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत आने वाली इस पंचायत में पहले भी छोटे-मोटे आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस बार दस्तावेजी सबूत के साथ मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित इस पोर्टल पर डेटा सार्वजनिक है, फिर भी जिला और जनपद स्तर पर कोई जांच नहीं हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पंचायतों में सचिव की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है क्योंकि वे ही ऑनलाइन एंट्री करते हैं, बिल अपलोड करते हैं और भुगतान प्रक्रिया शुरू करते हैं। सरपंच केवल हस्ताक्षर करता है। दोनों के मिलीभगत से घोटाला आसान हो जाता है।
क्या कहते हैं नियम?
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम के तहत सभी खर्चों का सार्वजनिक ऑडिट, सोशल ऑडिट और ग्राम सभा में पेश करना अनिवार्य है। लेकिन कुसमी में ऐसा होता दिखाई नहीं देता। 47वें संविधान संशोधन के तहत दी गई पंचायतों की शक्तियों का दुरुपयोग साफ नजर आ रहा है।
अब क्या होगा?
इस रिपोर्ट के आधार पर सागर जिला कलेक्टर, देवरी जनपद CEO, मध्य प्रदेश राज्य सतर्कता आयोग, ED और CBI (यदि राशि बड़ी है) को तुरंत जांच शुरू करनी चाहिए।
सभी बिलों की फॉरेंसिक जांच हो।
संबंधित सरपंच, सचिव और ठेकेदारों से हिसाब मांगा जाए।
रंगदारी या किकबैक का पैसा वसूला जाए।
दोषियों पर जेल और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई हो।
ग्राम पंचायत कुसमी के मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि डिजिटल इंडिया के बावजूद ग्रामीण स्तर पर भ्रष्टाचार कैसे फल-फूल रहा है।
जब तक पंचायतों में सख्त निगरानी, RTI का सही उपयोग और सीसीटीवी जैसी व्यवस्था नहीं होगी, आम गरीब किसान-मजदूर का पैसा लुटता रहेगा।
कुसमी के लोग अब चुप नहीं बैठेंगे। वे मांग कर रहे हैं कि पूरा मामला जन सुनवाई के जरिए उजागर किया जाए और दोषी अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई हो।
जांच एजेंसियों का इंतजार है...
क्या देवरी जनपद प्रशासन इस बार सख्ती दिखाएगा या फिर फाइलें दबा दी जाएंगी?