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चिलचिलाती गर्मी ने बढ़ाई चिंता: छोटे बच्चों और बीमार बुज़ुर्गों का खास ख्याल रखने की अपील,प्रेस क्लब लहरा के नेताओं ने लोगों को गर्मी, हीट स्ट्रोक बचन

23 मई: लहरागागा (सुरेश जवाहर वाला)
पिछले कुछ दिनों से इलाके में पड़ रही तेज़ गर्मी और गर्म मौसम ने लोगों की आम ज़िंदगी पर बुरा असर डाला है। सुबह से देर रात तक चलने वाली गर्म हवाओं और लू के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। इस भयानक गर्मी को देखते हुए प्रेस क्लब लहरा के प्रेसिडेंट अनिल जैन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ज़िला संगरूर और चेयरमैन दीपू गर्ग ने लोगों से खास सावधानी बरतने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि इस समय सबसे ज़्यादा खतरा छोटे बच्चों और बीमार बुज़ुर्गों को है, इसलिए परिवारों को उनकी सेहत के प्रति ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल, डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर, सांस और दूसरी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे बुज़ुर्गों को बिना वजह चिलचिलाती धूप में बाहर नहीं निकलना चाहिए और उन्हें समय-समय पर पानी, नींबू पानी, जूस और दूसरे लिक्विड देते रहना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। उन्होंने चेतावनी दी कि बहुत ज़्यादा गर्मी की वजह से बीमार बुज़ुर्गों को चक्कर आना, घबराहट, थकान, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव और सांस लेने में दिक्कत जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए, परिवार के लोगों को लगातार उनकी सेहत पर नज़र रखनी चाहिए।
प्रेस क्लब के नेताओं ने कहा कि छोटे बच्चों का शरीर गर्मी से जल्दी प्रभावित होता है, जिससे उन्हें बुखार, डिहाइड्रेशन और स्किन की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को ज़्यादा पानी पिलाएं, हल्के कपड़े पहनाएं और दोपहर में उन्हें बाहर खेलने से रोकें।
उन्होंने यह भी कहा कि AC या बहुत ठंडी जगह पर बैठने के बाद अचानक तेज धूप में बाहर जाना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे हीट स्ट्रोक और दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि जहां तक ​​हो सके, छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों को कूलर, पंखे या घने पेड़ों की ठंडी छांव में ज़्यादा समय बिताने के लिए बढ़ावा दें।
प्रेस क्लब के नेताओं ने घरों और आस-पास सफाई बनाए रखने की भी अपील की ताकि मच्छरों और गंदगी से फैलने वाली बीमारियों से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि मच्छरों का सबसे ज़्यादा असर कमज़ोर सेहत वाले छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों पर पड़ता है। उन्होंने इंसानों के साथ-साथ जानवरों और पक्षियों का भी ध्यान रखने की अपील करते हुए कहा कि घरों, दुकानों और पब्लिक जगहों के बाहर पानी के बर्तन रखने चाहिए ताकि बेजुबान जानवरों को भी इस चिलचिलाती गर्मी में राहत मिल सके।
पर्यावरण बचाने को आज की सबसे बड़ी ज़रूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाने और बच्चों को प्रकृति से जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि घने पेड़ गर्मी से सबसे बड़ा बचाव हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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