सरकारी कर्मचारी पर हमला, नगदी लूट, पोस्ट ऑफिस में तोड़फोड़ फिर भी जैथरा थाना बना मूकदर्शक*
*एटा पुलिस पर शर्मनाक दाग: धुमरी पोस्ट ऑफिस लूटकांड में एक सप्ताह तक FIR नहीं, पीड़ित सब पोस्ट मास्टर न्याय को तरसा*
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*सरकारी कर्मचारी पर हमला, नगदी लूट, पोस्ट ऑफिस में तोड़फोड़ — फिर भी जैथरा थाना बना मूकदर्शक*
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एटा। जनपद एटा के थाना जैथरा क्षेत्र अंतर्गत धुमरी स्थित सब पोस्ट ऑफिस में हुई सनसनीखेज लूट और सरकारी कर्मचारी पर हमले की घटना ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 19 मई को दिनदहाड़े आधा दर्जन दबंगों द्वारा धुमरी सब पोस्ट ऑफिस में घुसकर सब पोस्ट मास्टर अंशुल पाल के साथ बेरहमी से मारपीट, नगदी लूट और सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ किए जाने के बावजूद एक सप्ताह बीत जाने पर भी मुकदमा दर्ज न होना पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न माना जा रहा है।
पीड़ित सब पोस्ट मास्टर अंशुल पाल के अनुसार, हमलावरों ने पोस्ट ऑफिस में घुसते ही गाली-गलौज शुरू कर दी और विरोध करने पर लाठी-डंडों से हमला बोल दिया। आरोप है कि हमलावरों ने नगदी लूटने के साथ कार्यालय में जमकर उत्पात मचाया। हमले में घायल अंशुल पाल ने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी तथा थाना जैथरा पहुंचकर लिखित तहरीर भी दी। मेडिकल परीक्षण भी कराया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
घटना के बाद पीड़ित और उसका परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि थाना स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। एक सरकारी कर्मचारी के साथ खुलेआम मारपीट और लूट जैसी गंभीर वारदात में भी पुलिस की निष्क्रियता आम जनता में भारी आक्रोश पैदा कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पोस्ट ऑफिस जैसे सरकारी संस्थान और सरकारी कर्मचारी भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किन कारणों से इतने गंभीर मामले में पुलिस मुकदमा दर्ज करने से बचती नजर आ रही है।
घटना ने प्रदेश सरकार की अपराध के प्रति “जीरो टॉलरेंस” नीति पर भी बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामरन द्वारा कानून व्यवस्था मजबूत करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं थाना स्तर पर इस प्रकार की उदासीनता पूरे विभाग की छवि धूमिल करती दिखाई दे रही है।
क्षेत्रीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मामले में तत्काल FIR दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी तथा लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की मांग की है। अब निगाहें वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं कि पीड़ित को न्याय कब तक मिल पाता है।