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सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोकतंत्र में अंतिम संवैधानिक व्याख्या हो सकता है

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ प्रक्रियाओं को वैध माना है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उन पर सवाल उठाना असंवैधानिक हो गया। लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संस्थाएँ सम्मान के साथ-साथ जवाबदेही के दायरे में भी आती हैं। विपक्ष द्वारा मतदाता सूची संशोधन या SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाना संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किया गया राजनीतिक विरोध है।

संविधान ने विपक्ष को लोकतंत्र का प्रहरी बनाया है और असहमति को देशविरोध या लोकतंत्र विरोध बताना लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है। जनता का विश्वास, निष्पक्षता और पारदर्शिता लोकतंत्र के लिए आवश्यक हैं। राजनीतिक दलों का कर्तव्य जनता की शंकाओं को उठाना है न कि केवल सत्ता के निर्णयों पर मौन रहना। यदि भविष्य में किसी नागरिक का नाम गलत तरीके से सूची से हटता है तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

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