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सहित्यलोक संस्था ने किया वीर सावरकर जयंती पर गोष्ठी का आयोजन

मेरठ - साहित्यालोक केंद्रीय शाखा मेरठ द्वारा प्यारेलाल शर्मा सभागार में स्वातंत्र्य वीर सावरकर जयंती का आयोजन किया गया । ऋतु अग्रवाल की सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजेंद्र अग्रवाल पूर्व सांसद मेरठ हापुड़ लोकसभा ने सावरकर की जीवन यात्रा पर प्रकाश डाला । उन्होंने सावरकर को अंडमान की सेल्यूलर जेल में दिए गए अमानवीय अत्याचारों के बारे में विस्तार से बताया । सावरकर ने लगभग 10 वर्ष जेल की काल कोठरी में बिताए थे । मात्र 16 वर्ष की आयु में ही सामाजिक और विशेषकर हिंदुत्व के लिए समर्पित संगठन सावरकर ने गठित किये । संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध गर्ग ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने की माँग की । उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों को जाति के आधार पर देखना उचित नहीं है । संस्था के अध्यक्ष उमेश कुमार ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए सावरकर को श्रद्धांजलि अर्पित की । साहित्यालोक के संरक्षक एस के अग्रवाल ने सावरकर के संघर्षों के बारे में बताया । कार्यक्रम के दूसरे चरण में कवि सम्मेलन हुआ जिसमें स्थापित कवियों के साथ स्कूली बच्चों ने भी काव्य पाठ किया ।
सुमनेश सुमन ने कहा कि
वह अंगारा बना जैसे सुविवेक दिया परवानो ने। ..
जिस के मस्तक पर खुद ही अभिषेक किया तूफ़ानो ने .
जिस के नाम पूर्व उस दिन से वीर विशेषण लाते हैं .
उसी वीर सावरकर के प्रति हम सब शीष नवाते हैं .
कृष्ण गोपाल कंसल ने इन पंक्तियों से स्वतंत्रता सेनानियों का स्मरण किया ।
अपने गर्म लहू से सींचा, हिंदुस्तान शहीदों ने।
अपनी श्वास श्वास से गाया, मां का गान शहीदों ने।।
फांसी के फंदों को ही, समझा परिधान शहीदों ने।
मातृभूमि पर कर डाला सब,कुछ, कुर्बान शहीदों ने।।
दिव्यांश टंडन ने इन पंक्तियों के माध्यम से शहीदों को स्मरण किया ।
आज़ादी के कोख से उपजी एक पावन, पुनीत कहानी हूं,
ज्वाला बनकर धधक रही जो वो भगत सिंह सी जवानी हूं,
पुलकित पांडेय ने इन शब्दों से कहा कि
जिसने स्वतंत्रता का बीज बोकर ,
हमें क्रांति की राह दिखाई ।
अपना सावरकर कम ना था ,
देशभक्ति में कोई भ्रम ना था ।
आश्वी तायल ने सुनाया कि
केवल कण्ठ नही उसका तो कष्टो से अंग अंग नीला हुआ था , भारत की भूमि पर एक ऐसा वीर सावरकर पैदा हुआ था । कलम मे उसकी ऐसी धार थी करती तीक्षन प्रहार थी, उसने तो गोरो को दी भयंकर घातक मार थी ।
सिमरन ने कहा कि सावरकर वह वीर थे जिन्होंने आज़ादी की नींव रखी थी । स्टेला उपाध्याय ने भी काव्यपाठ किया । कार्यक्रम का संचालन संस्था के महामंत्री विनय नोक ने किया । शील वर्धन गुप्ता आशा त्यागी , अलका गुप्ता भारती सुमन दुबे श्याम मोहन मनोहन भल्ला गोयल , सुरेश चंद्र , नितिन गोयल , राधेश्याम गुप्ता , रमन कंसल , यशपाल जांगिड़ आदि उपस्थित रहे ।

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