मध्यप्रदेश में अतिथि विद्वानों की सेवा खतरे में, प्रशासन सुनवाई नहीं कर रहा
मध्यप्रदेश: प्रदेश के लगभग 5000 से अधिक जनभागीदारी अतिथि विद्वानों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। न तो उन्हें हरियाणा मॉडल का लाभ मिल रहा है और न ही प्रशासन उनकी बात सुन रहा है। उल्टा, उनकी सेवाएं समाप्त कर उन्हें बाहर किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद, मनीष गुप्ता (सुप्रा) मामले के अंतिम फैसले में कहा गया कि अतिथि को अतिथि से बदला न जाए, फिर भी कई कॉलेजों में अतिथि विद्वानों को बदल दिया जा रहा है।
खरगोन जिले के शासकीय महाविद्यालय बड़वाह में भी प्रोफेसर संजय यादव को हटाकर उनकी जगह किसी अन्य अतिथि फैकल्टी को रखने के लिए विज्ञापन जारी किया है। जनभागीदारी अतिथि विद्वान न्यायालय जाने के लिए मजबूर हैं। वे सरकार से समान वेतन, समान कार्य और सम्मान की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें शासकीय अतिथि विद्वानों की तरह देखा जा सके और उनका जीवन बेहतर हो सके।
By डॉ रवि चौबे