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"वक्त की कीमत और इंतज़ार की बेचैनी" *Shayeri शायरी*

"वक्त की कीमत और इंतज़ार की बेचैनी"
उस शख़्स से पूछिए जनाब, जिसने हर काम कर के देख लिया अपना वक्त बदलने के लिए, अब करने को कुछ भी नहीं उसके पास, बस अब उस वक्त की उमिद मे जी रहा है कि काश किसी वक्त मे उसका वक्त बदल जाए।
---असलम बाशा (A. B.)

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