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बड़ी कार्रवाई: भ्रष्टाचार के आरोप में सतारा की सरपंच लता फरांदे बर्खास्त

महाराष्ट्र में सरकारी पैसों के दुरुपयोग के खिलाफ एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। पुणे संभाग के विभागीय आयुक्त डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार ने सतारा तालुका की खेड ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती लता अशोक फरांदे को वित्तीय अनियमितताओं और गबन का दोषी पाए जाने पर पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें बचे हुए कार्यकाल के लिए सदस्यता से भी बेदखल कर दिया गया है।
​🔍 मुख्य बिंदु और घोटाला
​पुणे के निवासियों (अभिजीत खेडकर, उल्हास अग्निहोत्री और अभिषेक हरिदास) की लिखित शिकायत पर हुई उच्चस्तरीय जांच में निम्नलिखित खुलासे हुए हैं:
​लाखों का गबन: विकास कार्यों के नाम पर कुल ₹16,27,143 का सीधा गबन और ₹50,000 की अन्य वित्तीय गड़बड़ियां पाई गईं।
​कागजों में हेरफेर: गटर निर्माण, सड़क मरम्मत और साफ-सफाई जैसे बुनियादी कामों के दस्तावेजों में भारी विसंगतियां मिलीं।
​फर्जीवाड़ा: टेंडर प्रक्रिया में कमियां, अधूरा कैश रजिस्टर और रिकॉर्ड्स में अवैध बदलाव (Tampering) पाए गए।
​⚖️ कानूनी कार्रवाई और सह-आरोपी
​यह कार्रवाई 'महाराष्ट्र ग्रामपंचायत अधिनियम 1958 की धारा 39(1)' के तहत की गई है। इस घोटाले में सरपंच के अलावा दो अन्य को भी संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है:
​श्रीमती लता फरांदे (बर्खास्त सरपंच)
​अतुल जाधव (तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी) – इन्हें पहले ही निलंबित (Suspend) किया जा चुका है।
​एच. बी. चव्हाण (शाखा अभियंता)
​नोट: हालांकि सुनवाई के दौरान सरपंच ने सभी आरोपों को खारिज किया था, लेकिन जांच समिति के पुख्ता सबूतों के आधार पर आयुक्त ने उनकी दलीलों को अमान्य करते हुए यह सख्त फैसला सुनाया।
​इस कार्रवाई से पुणे और सतारा संभाग के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

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