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सहारा घोटाले में सरकार पूरी तरह नाकाम: 10 करोड़ जमाकर्ताओं में सिर्फ 41 लाख को मिला रिफंड

नई दिल्ली/बड़ौत/बागपत:30 मई 2026 सहारा सहकारी समितियों के करोड़ों जमाकर्ताओं के साथ केंद्र सरकार की रिफंड प्रक्रिया को एक बड़ी विफलता माना जा रहा है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी से साफ हो गया है कि सरकार के दावों के विपरीत रिफंड प्रक्रिया बेहद धीमी और अपर्याप्त है।
केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय (सीआरसीएस) द्वारा 27 मई 2026 को बरौत (उत्तर प्रदेश) के आरटीआई कार्यकर्ता नौशाद अली को दिए गए जवाब में खुलासा हुआ है कि:
20 मई 2026 तक सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल पर केवल 1 करोड़ 47 लाख 53 हजार 682 जमाकर्ताओं ने ही आवेदन किया है।
इनमें से सिर्फ 41 लाख 55 हजार 92 जमाकर्ताओं को 9 हजार 263 करोड़ 80 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।
पुनः प्रस्तुतीकरण पोर्टल पर भी मात्र 41 लाख 2 हजार 435 लोगों ने दावा दोबारा जमा किया है।
विश्व भारती जनसेवा संस्थान के संयुक्त सचिव एवं आरटीआई कार्यकर्ता नौशाद अली ने कहा है कि,
“देश भर में सहारा समूह की चार सहकारी सोसाइटियों में लगभग 10 करोड़ जमाकर्ता हैं। इनके अलावा अन्य कंपनियों को मिलाकर कुल 13 करोड़ जमाकर्ता प्रभावित हैं। लेकिन पोर्टल पर आवेदन करने वालों की संख्या बेहद कम है। यह साफ दिखाता है कि सरकार की रिफंड प्रक्रिया पूरी तरह विफल रही है।”
नौशाद अली ने आगे कहा कि
“41 लाख जमाकर्ताओं को सिर्फ 2000 रुपये से अधिकतम 50 हजार रुपये ही वापस किया गया है, वो भी बिना ब्याज के।
लगभग 5 लाख करोड़ रुपये (ब्याज समेत) का भुगतान लंबित है। सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। अगर सहारा समूह भुगतान नहीं करता है तो सरकार को सहारा की सभी संपत्तियों को जब्त करके नीलामी करनी चाहिए और ब्याज समेत पूरे पैसे जमाकर्ताओं को लौटाने चाहिए।”
दावे खारिज होने के कारण
सरकारी पत्र में दावे अस्वीकृत होने के कई औपचारिक कारण बताए गए हैं, जैसे दस्तावेजों में कमी, हस्ताक्षर न मिलना, फॉर्म अधूरा होना आदि। लेकिन आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये कारण जमाकर्ताओं को परेशान करने की रणनीति का हिस्सा हैं।
राज्यवार आंकड़े भी अलग से नहीं रखे जा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता की कमी साफ नजर आती है।
आरटीआई कार्यकर्ताओं की मांग:
विश्व भारती जनसेवा संस्थान समेत कई संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं कि सहारा रिफंड प्रक्रिया को तेज किया जाए, पोर्टल को सरल बनाया जाए और पूरे 13 करोड़ जमाकर्ताओं को ब्याज सहित उनका पैसा वापस दिलाया जाए।

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