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सिंगरौली की खदानों में चोरी का बढ़ता जाल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल.


सिंगरौली/जयंत। देश की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले सिंगरौली क्षेत्र की कोयला खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र की विभिन्न खदानों में डीजल, कोयला और कबाड़ चोरी की घटनाओं की लगातार चर्चाएं सामने आ रही हैं, जिससे खदान प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
जानकारी के अनुसार, खदान क्षेत्रों में बैरियर तोड़कर वाहनों के प्रवेश, डीजल की अवैध निकासी, कोयले की चोरी तथा खनन उपकरणों के कबाड़ की चोरी जैसी घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कड़ी सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के बावजूद चोरी की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खदानों में होने वाली ऐसी गतिविधियां न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि उत्पादन और संचालन व्यवस्था को भी प्रभावित करती हैं। सिंगरौली क्षेत्र में संचालित कोयला खदानें देश के बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, इसलिए सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक राष्ट्रीय हित से भी जुड़ा विषय है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि खदान क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराई जाए, सीसीटीवी निगरानी को और मजबूत बनाया जाए तथा चोरी में शामिल तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

खदान क्षेत्रों में डीजल, कोयला और कबाड़ चोरी की शिकायतें।
सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर उठ रहे सवाल।
सीसीटीवी और सुरक्षा कर्मियों की निगरानी बढ़ाने की मांग।
सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा।
सिंगरौली की खदानें देश की ऊर्जा जरूरतों का महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना समय की मांग है, ताकि राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा के साथ-साथ उत्पादन प्रक्रिया भी निर्बाध रूप से जारी रह सके।

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