शाहपुर पटोरी: विकास के दावों के बीच "नरक" बनता एक शहर !
शाहपुर पटोरी कहने को तो यह एक नगर परिषद क्षेत्र है, लेकिन हकीकत यह है कि आज पटोरी का बच्चा-बच्चा यहां फैले भ्रष्टाचार की गवाही दे रहा है। स्थानीय प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, हर कोई अपनी जेबें भरने में व्यस्त है, और जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है। पटोरी आज विकास का नहीं, बल्कि "लूट का अड्डा" बन चुका है।
हाल ही में बीते दिनों मुस्लिम समुदाय के पवित्र त्योहार बकरीद के मौके पर जो तमाशा देखने को मिला, वह इस व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करने के लिए काफी है। पुरानी बाजार मस्जिद के ठीक सामने जहां लोग नमाज पढ़ने आते हैं वहां का हाल काफी शर्मिंदा करने वाला है ।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के निर्देश पर पुरानी बाजार से मोहनपुर ब्लॉक (पटोरी अनुमंडल मुख्यालय को मोहनपुर से जोड़ने वाली मुख्य सड़क) पर चार-पांच ट्रैक्टर मिट्टी गिरवाकर छोड़ दी गई।
शुक्रवार को हुई जोरदार बारिश के बाद इस मिट्टी ने जो रूप अख्तियार किया, उसने इस मुख्य सड़क को नरक से भी बदतर बना दिया है। दलदल बन चुकी सड़क पर चलना दूभर है, चारों तरफ दुर्गंध फैली है और मच्छरों का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि महामारी का खतरा मंडराने लगा है। क्या त्योहारों पर जनता को यही तोहफा मिलता है?
सफाईकर्मियों के हक पर भी डाका :
भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर की सड़कों पर झाड़ू लगाने वाले गरीब मजदूरों के पैसों में भी कमीशनखोरी हो रही है। नाम न छापने की शर्त पर एक वार्ड पार्षद ने खुद इस काले सच को स्वीकार किया है कि:
"सफाई का ठेका लेने वाले ठेकेदार की तरफ से प्रत्येक वार्ड पार्षद, मुख्य पार्षद (मेयर) और उप-मुख्य पार्षद (डिप्टी मेयर) को हर महीने बंधी-बंधाई रकम (कमिशन) पहुंचाई जाती है।"
जब गरीबों के पसीने की कमाई और सफाई के बजट का एक बड़ा हिस्सा रिश्वत की भेंट चढ़ जाएगा, तो शहर की स्थिति नरकीय नहीं होगी तो क्या होगी?
इस पूरे पाप में सबसे दुर्भाग्यपूर्ण भूमिका समाज के आईने यानी 'समाचार पत्रों के नुमाइंदों' की रही है। इन्हें 'पत्रकार' कहना पत्रकारिता शब्द का अपमान होगा। चंद रुपयों और 'साइड इनकम' के जुगाड़ के चक्कर में इन खबरनवीसों ने अपनी कलम को गिरवी रख दिया है। ये उतना ही लिखते हैं जिससे इनका स्वार्थ सिद्ध हो सके और अधिकारियों व नेताओं की कुर्सी बची रहे। जनता की आवाज को उठाने वाला कोई नहीं बचा है।
सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह है कि जब बिहार सरकार के कद्दावर नेता और डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी इसी क्षेत्र से आते हैं, तो पटोरी का यह हाल क्यों है?
क्या पटोरी की जनता के साथ राजनीतिक प्रतिशोध लिया जा रहा है?
क्या सिर्फ इसलिए कि यहां की एक बड़ी आबादी सरकार के पक्ष में वोट नहीं करती, उसका गुस्सा इन आम नागरिकों पर उतारा जा रहा है?
यह पूरी तरह से लोकतंत्र और जनभावनाओं का अपमान है।
आने वाले दिन और भी भयावह होने की उम्मीद है अभी तो मानसून की ठीक से शुरुआत भी नहीं हुई है। जब महज एक दिन की बारिश ने पूरे शाहपुर पटोरी नगर परिषद क्षेत्र को टापू और नरक में तब्दील कर दिया, तो आने वाले दिनों में जब लगातार बारिश होगी, तब पटोरी का क्या हाल होगा? हर साल की भांति इस साल भी जनता को सिर्फ वादे और जलजमाव मिलने वाला है।
समय आ गया है कि पटोरी की जनता इस संगठित लूट, कमीशनखोरी और नेताओं के नैतिक पतन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करे। अगर आज चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियां इस नरक में जीने को मजबूर होंगी।
मनीष सिंह
शाहपुर पटोरी
@ManishSingh_PT