माता-पिता को अपनी बेटियों की शादी कभी भी गरीब या कम आय वाले लड़के से नहीं करनी चाहिए।
जो लड़का कम से कम 2 BHK फ्लैट नहीं खरीद सकता और फॉर्च्यूनर या स्कॉर्पियो जैसी महंगी कार नहीं खरीद सकता, वह उनकी नजर में शादी के लायक नहीं है। यह विचार आज के समय की बहुत ही भौतिकवादी और व्यावहारिक मानसिकता को दर्शाता है। इसमें कोई शक नहीं कि सुचारू वैवाहिक जीवन के लिए वित्तीय सुरक्षा बहुत जरूरी है, इस दृष्टिकोण के दोनों पहलुओं को समझना जरूरी है: व्यावहारिक पक्ष इस विचार के पीछे चिंता माता-पिता की है। आज के समय में महंगाई बहुत बढ़ गई है और हर कोई चाहता है कि उनकी बेटी को शादी के बाद आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। अच्छी आय जीवन की बुनियादी जरूरतों और अच्छी सुविधाओं को सुनिश्चित करती है। दूसरा पक्ष: चरित्र बनाम नकद लेकिन अगर रिश्ते सिर्फ बैंक बैलेंस देखकर बनाए जाते हैं, तो इसके कई नुकसान हो सकते हैं: तरक्की की संभावना कई युवा अपने करियर के शुरुआती दौर में 2 BHK फ्लैट या लग्जरी कार नहीं खरीद पाते, लेकिन वे मेहनती, ईमानदार और पढ़े-लिखे होते हैं। समय के साथ, वे अपनी मेहनत की वजह से बहुत सफल हो जाते हैं। किसी की मौजूदा हालत से ज़्यादा ज़रूरी है उसका 'इरादा और मेहनत' देखना। दौलत हमेशा स्थिर नहीं रहती: बिज़नेस या नौकरी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। अगर रिश्ते की नींव सिर्फ़ पैसा है, तो पैसा कम होने पर रिश्ते में दरार आने का खतरा सबसे ज़्यादा होता है। शादी के लिए लड़के का आत्मनिर्भर होना और अच्छी-खासी कमाई करना बहुत ज़रूरी है, लेकिन लग्जरी चीज़ों को ही योग्यता की एकमात्र शर्त बनाना शायद इंसानी मूल्यों और रिश्तों की गंभीरता को नज़रअंदाज़ करने जैसा है। इस पर आपकी अपनी क्या राय है? क्या आप इस कड़े आर्थिक पैमाने से सहमत हैं, या आपको लगता है कि लड़के की मेहनत और किरदार को ज़्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए? 🍳*हरबंस सिंह, सलाहकार* 🙏🏻
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