शिक्षा की वर्तमान स्थिति, चुनौतियां और भविष्य पर मंथन
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही विकसित समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला : डॉ. पुनीत सिंह
डेहरी-ऑन-सोन/सासाराम, संवाददाता (आर.के. सिंह):
स्थानीय एक निजी होटल में शनिवार को "शिक्षा की वर्तमान स्थिति, चुनौतियां और भविष्य" विषय पर प्रबुद्धजनों, शिक्षाविदों एवं अधिवक्ताओं की एक महत्वपूर्ण आमसभा आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. पुनीत सिंह ने की, जबकि मंच संचालन आर.के. सिंह ने किया। सभा में बड़ी संख्या में शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों एवं अधिवक्ताओं ने भाग लेकर शिक्षा व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चिंतन-मंथन किया। सभा का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने तथा बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने पर विचार-विमर्श करना था। अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. नंद कुमार सिंह यादव ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक ज्ञान, कौशल विकास तथा नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. पुनीत सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हम शिक्षा को रोजगार, शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ें। यदि शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार किया जाए तो बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है और युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि "लड़ाई केवल तलवार और बंदूक से नहीं लड़ी जाती, बल्कि विचार, ज्ञान और कलम की ताकत से भी समाज में परिवर्तन लाया जाता है।" इसलिए शिक्षित समाज के निर्माण के लिए हम सभी को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक पहल को गति देनी होगी।
वक्ताओं ने शिक्षकों के नियमित प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, नैतिक शिक्षा, तकनीकी दक्षता तथा रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों पर समय-समय पर ऐसे विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।कार्यक्रम के मुख्य व्यवस्थापक शिक्षाविद सुभाष प्रसाद (एस.पी. सिंह) ने कहा कि क्षेत्र में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार करने तथा युवाओं को नई दिशा देने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने ऐसे आयोजनों को जन-जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बताया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित डॉ रामनाथ सिंह, डॉ अमिताभ सिंह, सरबजीत सिंह, दिलीप तिवारी, मनोज कश्यप राधे-राधे डॉ रणधीर सिंहा विमल सिंह, योग गुरु शैलेन्द्र सिंह अशोक सिंह,सभी प्रतिभागियों ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से समाज के समग्र विकास, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया। सभा का समापन शिक्षा सुधार और सामाजिक जागरूकता के संदेश के साथ हुआ।