हिंदी दिवस और हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाते-मनाते हिंदी की दशा और दिशा
आज देशभर में हिंदी दिवस और हिंदी पत्रकारिता दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों तथा मीडिया संस्थानों में हिंदी के सम्मान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। वहीं 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है, क्योंकि 1826 में इसी दिन पहला हिंदी समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड प्रकाशित हुआ था।
लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल दिवस मनाने से हिंदी का विकास हो रहा है?
एक ओर हिंदी विश्व की प्रमुख भाषाओं में गिनी जाती है, करोड़ों लोग इसे बोलते और समझते हैं, डिजिटल माध्यमों पर हिंदी सामग्री तेजी से बढ़ रही है। दूसरी ओर शिक्षा, न्यायपालिका, विज्ञान, तकनीक और कॉर्पोरेट क्षेत्र में अंग्रेज़ी का प्रभाव आज भी अधिक दिखाई देता है। कई लोग हिंदी बोलने में गर्व महसूस करने के बजाय संकोच करते हैं। हाल के वर्षों में कई सार्वजनिक व्यक्तियों ने भी इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि अंग्रेज़ी न बोल पाने वालों को अक्सर कम आंका जाता है।
हिंदी बोलने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर हिंदी का प्रयोग बढ़ा है। किंतु वो हिंदी भी अंग्रेजी में होती है, या गूगल इनपुट जैसा देदे वैसा हम लिखते हैं।
कई सरकारी योजनाओं और सेवाओं में हिंदी को प्राथमिकता दी जा रही है, फिर भी उच्च शिक्षा और रोजगार के अनेक क्षेत्रों में अंग्रेज़ी का वर्चस्व बना हुआ है।
पत्रकारिता और मीडिया में भाषा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। हिंदी दिवस और हिंदी पत्रकारिता दिवस केवल औपचारिक आयोजन नहीं होने चाहिए। हिंदी की वास्तविक उन्नति तब होगी जब हम दैनिक जीवन, शिक्षा, तकनीक और पत्रकारिता में शुद्ध, सरल और प्रभावी हिंदी का प्रयोग करेंगे। हिंदी की दशा सुधारने के लिए केवल भाषण नहीं, बल्कि व्यवहार में हिंदी को अपनाना आवश्यक है। उदाहरण के लिए चारधाम यात्रा से संबंधित एक सर्कुलर जारी हुआ, और हिंदी की दशा सामने आई।