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सरकारी नौकरी भर्ती घोटाले का भंडाफोड़, हेल्थ वर्कर, सरपंच समेत 4 गिरफ्तार

अमृतसर। विजिलेंस ब्यूरो ने सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर लोगों को ठगने वाले गिरोह का वीरवार को पर्दाफाश किया है। ब्यूरो की टीम ने ट्रैप लगा कर मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर और सरपंच सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे में शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए 50 हजार रुपये भी बरामद कर लिए हैं।

विजिलेंस ब्यूरो के डीजी बीके उप्पल ने वीरवार की देर रात प्रेस को जारी एक बयान में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तरनतारन ब्यूरो यूनिट के डीएसपी हरजिंदर सिंह ने ट्रैप लगाकर एमपीएच पृथीपाल सिंह और उसके साथी वरपाल गांव के मलकीत सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार करके उनके कब्जे से पीड़ित द्वारा दिए गए 50 हजार रुपये बरामद कर आरोपियों के खिलाफ रिश्वतखोरी का केस दर्ज कर लिया। उन्होंने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि लुधियाना निवासी किंगपिन सुखवंत सिंह यह नैक्सस लुधियाना से चला रहा है, जो लोगों को नौकरी का झांसा देकर अपने जाल में फांसकर ठगी कर रहा है।

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि सुखवंत सिंह ने तरनतारन के मोहल्ला जसवंत सिंह नगर निवासी बरिंदरपाल सिंह को पीएसपीसीएल में हेल्पर की नौकरी दिलाने के नाम पर उससे तीन लाख रुपये लेने थे, जबकि उन दोनों के हिस्से 25-25 हजार रुपये आने थे। इससे पहले सुखवंत सिंह ने अमृतसर जिले के मल्लियां गांव के रहने वाले हरप्रीत सिंह से भी 1.5 लाख रुपये ठगे थे। मलकीत सिंह ने यह भी बताया कि कद गिल गांव का सरपंच हरपाल सिंह भी तरनतारन और अमृतसर में इसी तरह का गिरोह चला रहा है। डोमनिक सहोता के जरिए साल 2019 में उसने चार लोगों को बीएसएफ में लिखित मेडिकल टेस्ट करवा कर प्रत्येक से 2.80-2.80 लाख रुपये लिए थे।

जांच में यह भी सामने आया कि डोमिनिक सहोता गैंगेस्टर है, जिसे मोहाली पुलिस ने जनवरी 2021 में गिरफ्तार कर 364-ए, 34 आईपीसी और 25-54-59 असलहा एक्ट का केस दर्ज किया था।

मोहाली पुलिस ने इसके कब्जे से 32 बोर के तीन अवैध हथियार और एक देसी कट्टा बरामद करने के साथ ही एक जाली पहचान पत्र, एक यूनिफार्म, एक लैपटॉप और चार वाहन बरामद करने के साथ ही फिरौती के लिए ली गई 2.5 लाख रुपये की राशि भी बरामद की थी। सहोता खुद को बीएसएफ का सहायक कमांडेंट और उसका पिता गोविंदर सिंह इंस्पेक्टर बताया था।

सहोता का भाई मुखत्यार सिंह उर्फ पीटर, अमनदीप सिंह, राजवीर सिंह और युद्धवीर सिंह को भी मोहाली पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किया था। जो आजकल रोपड़ जेल में बंद हैं। उन्होंने कहा कि रिश्वतखोरी के मामले में सहोता को रोपड़ की जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस मामले में ने ब्यूरो में शिकायत दी थी। जिसमें उसने बताया था कि वह तरनतारन जिला के गांव धोतियां के प्राइमरी हेल्थ सेंटर में तैनात मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर (एमपीएच) प्रिथीपाल सिंह के साथ उसकी पहचान थी, जिसने उसे सरकारी नौकरी पर रखवाने की पेशकश की। उसने बताया कि वह यह नहीं चाहता लेकिन वह (आरोपी) उसके चक्क सिकंदर गांव के रहने वाले रिश्तेदार हरमनदीप सिंह को नौकरी पर रखवा दे।

शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी प्रिथीपाल सिंह इसके लिए उसे मलकीयत सिंह से मिलवाया, जिसने खुद को पंजाब सरकार के परसोनल विभाग का कर्मचारी बताया और सरकारी नौकरी लगवाने के बदले 3.50 लाख रुपये की मांग की।

इसमें से आरोपियों ने 1.75 लाख रुपये पहले देने को कहा, जबकि आरोपी पऱिथिपाल सिंह पहले ही 5 जुलाई 2021 को उनसे 10 हजार रुपये ले चुका था। पीड़ित ने ब्यूरो को बताया कि पऱिथीपाल सिंह ने उन्हें फोन करके 1.75 लाख रुपये देने को कहा ताकि भरती पऱकऱिया शुरू की जा सके।

शिकायतकर्ता ने ब्यूरो को बताया कि प्रिथीपाल सिंह ने उनसे कहा कि अगर उक्त राशि का प्रबंध नहीं है तो वह एक लाख या पचास हजार रुपये दे दे। शिकायतकर्ता क्योंकि रिश्वत देकर सरकारी नौकरी नहीं पाना चाहता था और इस गिरोह का भी भंडाफोड़ करना चाहता था। तो पीड़ित ने ब्यूरो के पास पहुंच कर बताया कि आरोपी पऱिथीपाल सिंह और मलकीत सिंह उनसे पचास हजार रुपये की मांग कर रहा है।


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