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नेशनल क्रिकेट टीम में शामिल करने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले तीन गिरफ्तार

नेशनल क्रिकेट टीम में शामिल करने के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को एक फाइव स्टार होटल से गिरफ्तार कर लिया है।

बताया जा रहा है कि आरोपियों के कब्जे से गांजा व चरस भी बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कई खिलाड़ियों के दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। पुलिस को संदेह है कि आरोपी अभी भी किसी नए खिलाड़ी के साथ ठगी करने की तैयारी कर रहे थे। वहीं आरोपियों के खिलाफ मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में भी एक एफआईआर दर्ज है।

पुलिस के अनुसार आरोपियों को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से दो को पुलिस रिमांड पर लिया गया है। जबकि चित्रा बोरा को जेल भेज दिया है। सेक्टर-50 थाना में करीब एक सप्ताह पहले क्रिकेट में पेड प्रोफेशनल बनाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का झांसा देकर पैसे ऐंठते हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आशुतोष बोहरा और चित्रा बोरा के रूप में हुई है। दोनों आरोपी गुड़गांव के एक फाइव स्टार होटल में ठहरे हुए थे, जहां से पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इस ठगी को लेकर जालौन उत्तर प्रदेश निवासी अंशुल राज केस दर्ज कराया था। उसने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह साल 2011 में चिरंजीव भारती स्कूल की क्रिकेट टीम में खेलते थे। स्कूल की शिक्षा पूरी होने के बाद उन्होंने साल 2016 में दिल्ली की डेयरडेविल क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कर ली। साल 2018 में वह गोल्डन हॉक एकेडमी में प्रैक्टिस करने लगे। यहां उनकी मुलाकात बापरोला क्रिकेट एकेडमी के राज राजपूत से हुई। राजपूत ने उन्हें साल 2019 में दीपक से मिलवाते हुए पूर्वोत्तर राज्य के लिए क्रिकेट खेलने की बात कहते हुए एक लाख रुपए लिए। दीपक ने उन्हें SDCM एकेडमी के कोच अमित से मिलवाया। कुछ समय तक उनकी एकेडमी में प्रैक्टिस करने के बाद अंशुल ने पूर्वोत्तर राज्य की टीम की बजाय किसी राज्य की टीम से खेलने की इच्छा जताई। आरोप है कि कुछ दिन बाद उन्हें आरोपियों ने HPCA का एक लेटर दिखाया, जिसमें अंशुल राज का सिलेक्शन होने की बात कही। इस लेटर में क्रिकेट सत्र 2019-20 के दौरान अंशुल को सीनियर स्टेट अंडर-23 कर्नल सी के नायडू ट्रॉफी में खेलने का अवसर देने की बात कही गई। इस लेटर को सार्वजनिक न होने की बात कही। आरोपियों ने उसे झांसा दिया कि इस लेटर को HPCA स्वयं सार्वजनिक करेगी, लेकिन इसके लिए 10 लाख रुपए का भुगतान करना होगा। अंशुल ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उसे आशुतोष बोरा, चित्र बोरा और पुष्कर तिवारी से गुरुग्राम के सेक्टर-49 स्थित कार्यालय में मिलाया था। आरोपियों ने आशुतोष को गल्फ सॉल्यूशन इंटरप्राइजेज कंपनी का प्रबंधक होने की बात कही और यह रुपए उन्हीं को दिए जाने की बात कही। इस पर अंशुल ने अपने पिता से बात करके आशुतोष की बात कराई। यहां सौदा 9 लाख रुपए में तय हुआ था। इसे अंशुल के पिता ने तीन किस्तों में दे दिया। इसके बाद 6 फरवरी 2020 को आरोपी उसे हिमाचल प्रदेश ले गए। यहां उसे हिमाचल की टीम में स्टैंडबाय प्लेयर होना बताते हुए उसे टीम की ड्रेस व किट दे दी। इससे वह टीम के ड्रेसिंग रूम व उनके बैठने की जगह पर आराम से आ जा सकता था। अंशुल ने आरोप लगाया कि बाद में हिमाचल टीम के राज्य से बाहर जाने के बारे में पता लगा, लेकिन उसमें अंशुल का नाम नहीं था। इस पर उसने आरोपियों से बात की तो उन्होंने बहाना बनाते हुए अंशुल को अपने पास बुला लिया कि उसका गेस्ट प्लेयर के नाम पर सिलेक्शन हुआ था। ऐसे में कुछ लोगों को उसके टीम में रहने पर ऐतराज था। उसके खेलने पर पाबंदी न लग जाए, ऐसे में उसका नाम हिमाचल टीम से वापस ले लिया गया है, लेकिन इस मामले में संदेह होने के बाद पीड़ित ने अपने रुपए वापस मांगे तो आरोपियों ने पैसे देने से मना कर दिया था। जिस पर यह केस दर्ज कराया था।

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